E-इश्क:उस रंगीन सांझ को जब मैं छत पर अकेला पढ़ रहा था, अलेक्जेंडर चुपके से आई और पीछे से मुझे बाहों में भर कर बोली, ‘’तू ही मिलना मुझे हर जनम में"



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