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Showing posts from August, 2020

पारूल अरोड़ा ने साड़ी में और माइकल सिंह ने सूट-बूट में क्या खूब किया फ्लिप फ्लॉप, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ वीडियो

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ऐसी कई महिलाएं हैं जिनके लिए साड़ी पहनकर चलना, उठना, बैठना या काम करना मुश्किल होता है। लेकिन साड़ी पहनकर डांस जैसे कठिन काम को एक महिला ने बखूबी कर दिखाया है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो रहा है जिसकी लोग खूब तारीफ कर रहे हैं। डांस करने वाली महिला का नाम पारुल अरोड़ा है। उसने साड़ी में बेहतरीन फ्लिप फ्लॉप डांस किया। इसके डांस का वीडियो देखकर लोगों को हैरानी हो रही है। कई लोग इस वीडियो को फेक मान रहे थे। लेकिन जब ये पता चला कि पारुल एक नेशनल लेवल गोल्ड मेडलिस्ट जिमनास्ट है तो यकीन हुआ कि वे इस लैंडिंग को कर सकती हैं। इस वीडियो को अब तक 4000 व्यूज मिले हैं। इसे 27,000 से ज्यादा लोग देख चुके हैं। पारुल के साथ-साथ इस वीडियो में जो लड़का है, वो भी अपने स्टंट्स के लिए मशहूर है। ट्विटर पर इस लड़के की प्रोफाइल माइकल होशियार सिंह के नाम से है और उसने भी कुछ ज़बरदस्त स्टंट किये हैं। ## सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होते ही पारुल को तरह-तरह के कमेंट्स मिल रहे हैं। कोई उन्हें डेयरडेविल कह रहा है तो एक महिला ने यह भी कहा कि मैं तो साड़ी पहनकर चल भी नहीं सकती। ## एक महिला ने कहा जब मै...

भारत की पहली कॉर्डियोलॉजिस्ट थीं डॉ. एस पद्मावती, 103 साल की उम्र में कोविड-19 की वजह से हुआ निधन

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डॉ. एस पद्मावती 103 साल की उम्र में कोविड-19 के चलते इस दुनिया में नहीं रहीं। नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट ने 30 अगस्त को यह जानकारी दी। उनका पिछले 11 दिनों से नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट में इलाज चल रहा था। 30 अगस्त को ही पंजाबी बाग स्थित कोविड-19 शवदाह गृह में उनकी अंत्येष्टि की गई। इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक, बेहद कम संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए मौजूद रहे। उनका जन्‍म म्‍यांमार में हुआ था। उन्होंने रंगून मेडिकल कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद कार्डियोलॉजी में अपने करिअर की शुरुआत की। डॉ पद्मावती को भारत में पहली कार्डियक केयर यूनिट की स्थापना का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने 1981 में नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट की स्थापना की थी। पद्मावती को कोविड-19 के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया था। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और बुखार भी था। निमोनिया का असर उनके दोनों लंग्स पर हुआ जिसकी वजह से उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। कार्डियक अरेस्ट की वजह से वे चल बसीं। पद्मावती के मेडिकल के क्षेत्र में सराहनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 1967 में उन्हें पद्म भूषण स...

मॉडर्न इंटीरियर यानी हर कमरे के लिए अलग लाइट, इस मॉनसून मॉडर्न और रेट्रो लाइटिंग से घर को दे नया लुक

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होम इंटीरियर का बेहद खास हिस्सा होती है लाइटिंग। यह घर का माहौल बदल देती है। मॉडर्न इंटीरियर की बात करें तो अब हर रूम के लिए अलग डिजाइन की लाइट होती है। जो बेडरूम में अच्छी लगती है, जरूरी नहीं वह किचन में भी अच्छे लगे। इस ट्रेंड के लिए काफी हद तक टेक्नोलॉजी भी जिम्मेदार है। इंटीरियर डिजाइनर्स की माने तो होम मेकओवर में अब एडवांस फिक्सचर्स और बल्ब्स बहुत मायने रखते हैं। घर को नए अंदाज में रोशन करने के लिए मॉनसून पर्फेक्ट सीजन है। इंटीरियर लाइटिंग में इस साल बड़े बदलाव तो नहीं हुए हैं, लेकिन जो है वह देखने लायक है। सॉफ्ट गोल्ड- अब सॉफ्ट कलर पसंद किए जा रहे हैं। ग्रे और बेज कॉम्बिनेशन तेजी से मशहूर हुआ है। सॉफ्ट गोल्ड भी खास बना हुआ है। मॉडर्न हो या अर्बन यह डेकोर के साथ आसानी से ब्लेंड हो जाता है। ऐसे करें इस्तेमाल- सॉफ्ट गोल्ड लाइटनिंग फिक्सचर्स कई स्टाइल और डिजाइन से मिलते हैं। ओवरहेड लाइटनिंग के लिए ऐसे फिक्सचर्स का चुनाव कर सकते हैं, जिसमें सॉफ्ट गोल्ड हो। ऐसे फिक्सचर्स देख सकते हैं, जिसमें सॉफ्ट गोल्ड के साथ अन्य सॉफ्ट शेड्स हो- जैसे ग्रे और मैट सिल्वर। घर के खास कौनर्स या वॉल्...

मेकअप प्रोडक्ट्स और ब्यूटी टूल्स सैनिटाइज करने के लिए इस्तेमाल करें स्टरलाइज़र मशीन, मेकअप ब्रश की सफाई में कारगर डिसइंफेक्टेंट स्प्रे

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कोरोना काल में हाइजीन जीवन का जरूरी हिस्सा बन गया है। फिर चाहे वो ब्यूटी टूल्स ही क्यों न हों। इन्हें साफ़ रखना भी बहुत जरूरी है। ब्लश और कॉम्पैक्ट को एक ही ब्रश की मदद से लगाया जाता है। लिपस्टिक बुलेट्स, आई-लाइनर स्टिक्स और मस्कारा वैंड्स का उपयोग भी बार-बार किया जाता है। ब्रश और स्पॉन्ज कई बार पैन व ट्यूब में आते-जाते हैं। नेल फाइलर और कंघी भी लगातार स्किन के सम्पर्क में आते हैं। आप अकेले इनका उपयोग करते हैं तो भी डेड स्किन, पसीना और ऑइल लगातार जमा होता ही रहता है। जानिए मेकअप प्रोडक्ट को घर में सैनिटाइज करने के कुछ टिप्स। स्टरलाइज़र मशीन जो लोग डिसइंफेक्टेंट को लेकर गंभीर हैं, उनके लिए यह एक आदर्श विकल्प है। पोर्टेबल हो या परमानेंट इसकी मदद से लगभग हर चीज सैनिटाइज की जा सकती है। इसमें मेकअप प्रोडक्ट्स, ब्यूटी टूल्स, चाबियां और वॉलेट को भी सैनिटाइज किया जा सकता है। यूवी लाइट डिसइंफेक्टेंट यह होम गैजेट यूवी लाइट्स स्टरलाइजर सैनिटाइजर वैंड, पोर्टेबल यूवी लाइट डिसइंफेक्शन लैम्प है जो घर, होटल, ट्रैवल कार में रखने के लिए चार्जेबल और फोल्डेबल भी है। इससे 99 प्रतिशत जर्म्स और बैक्टीरि...

हाेम डेकोर के लिए प्रिंटेड शिफॉन की साड़ियों से बनाएं खिड़कियों के परदे, डाइनिंग टेबल रनर्स बनाकर बढ़ाएं अपने रूम की शान

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साड़ियों की शौक़ीन कौन स्त्री नहीं होगी और पुरानी होती साड़ियों की फ़िक़्र भी किसे नहीं सताती होगी। तो ऐसे में जिन्हें सिलाई का थोड़ा-बहुत भी शौक़ है या कुछ तरकीबों को आज़माना आता है, तो पुरानी साड़ियों से घर को नवेला लुक देना चुटकी बजाते ही हो जाएगा। 1. शिफॉन के पर्दे शिफॉन की साड़ियां पहनने में जितनी ख़ूबसूरत लगती हैं, इनके पर्दे भी उतने ही सुंदर दिखते हैं। अगर आपको थोड़ा बदलाव करना है तो शिफॉन की प्लेन साड़ी को खिड़की का पर्दा बना दें। सामान्य पर्दों के साथ मिलाकर भी बीच में डाल सकती हैं और रिबन या लैस से बांध सकती हैं। या फिर अलग-अलग रंग की प्लेन शिफॉन साड़ियों के पर्दे बनाकर लगाएं। 2. प्रिंटेड से दें नया रूप यदि हमेशा प्लेन पर्दे डालती हैं तो इस बार कुछ नया आज़माएं। प्लेन पर्दों के बीच में प्रिंटेड साड़ी का पर्दा लगाएं। पर्दे के रंग से मिलते-जुलते रंग की साड़ी का चयन करें। ऐसा भी कर सकती हैं कि पूरे पर्दे प्रिंटेड ही रखें। ये तरीक़ा भी काफ़ी जंचेगा। इस तरह थोड़ा बदलाव भी हो जाएगा और साड़ियों का सही इस्तेमाल भी होगा। 3. कुशन कवर आज़माएं अगर शादी की साड़ियां रखी हैं जो अब पहनने में नहीं आती हैं तो...

दिल्ली में महिलाओं के लिए कमाई का जरिया बनी 'उम्मीद की रसोई', उन महिलाओं के जीवन में जागी उम्मीद जिनकी नौकरी लॉकडाउन में छूट गई है

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राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत शुरू की गई 'उम्मीद की रसोई' उन महिलाओं को रोजगार प्रदान करती है, जिनकी नौकरी कोविड-19 की वजह से छूट गई है। दिल्ली की बुद्ध नगर निवासी आरती महामारी से पहले लोगों के घरों में खाना बनाने का काम करती थी। लॉकडाउन की वजह से उसकी नौकरी छूट गई। ऐसे में उसके लिए अपने परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हुआ। लेकिन नई दिल्ली की उम्मीद की रसोई का हिस्सा बनने के बाद वह खुश है। आरती कहती है - ''हम पांच लोगों की टीम है। हमने मिलकर तीन किलो चावल और दो किलो राजमा बनाएं। पहले ही दिन 2:30 बजे तक सारा खाना बिक गया। अपने काम की शुरुआत हमने राजमा-चावल से की है। धीरे-धीरे अपने मेन्यू में और चीजें भी शामिल करेंगे''। नई दिल्ली में अब तक की गई पहल जैसे 'उम्मीद की राखी' और 'उम्मीद के गणपति' की सफलता के बाद उम्मीद की रसाई की सफलता की आशा की जा रही है। यह प्रोजेक्ट स्व सहायता समुहों के लिए बनाया गया है। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट तन्वी गर्ग के अनुसार ये रसोई उन महिलाओं के जीवन में उम्मीद जगाएगी जो लॉकडाउन की वजह से अपनी नौकरी खो चुकी हैं। तन्वी...

त्वचा के इन 5 संकेतों को न करें नजरअंदाज, आंखों के नीचे काले घेरे हो तो आयरन से भरपूर चीजें खाएं, चेहरे पर मुंहासे होने पर शक्कर की मात्रा कम कर दें

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शीशे के सामने खड़े होकर अपना चेहरा क़रीब से देखिए। ग़ौर कीजिए कि आपकी त्वचा आपकी सेहत के बारे में क्या संकेत दे रही है! चेहरे पर मुंहासे, होंठ फटना या त्वचा पर खुजली होना आम समस्याएं लगती हैं। कई दफ़ा हम सोचते हैं कि प्रदूषण, मौसम या हॉर्मोन में बदलाव इसके कारण हैं। परंतु हर बार ऐसा नहीं होता है। ये अंदरूनी समस्याएं भी हो सकती हैं, जो त्वचा पर नज़र आने लगती हैं। कुछ ऐसी ही त्वचा संबंधी समस्याएं आपको बता रहे हैं, जो आम लगती हैं, लेकिन असल में ये आपकी सेहत का हाल बताती हैं। 1. आंखों के नीचे काले घेरे आंखों के नीचे काले घेरे शरीर में कई तरह की कमज़ोरी का परिणाम होते हैं। अधिक नींद लेना, ज्यादा थकान, ज्यादा देर तक जागते रहना, टीवी या लैपटॉप/कंप्यूटर स्क्रीन पर अधिक वक़्त बिताना या अनियमित जीवनशैली के कारण बहुत से लोग काले घेरों की समस्या से पीड़ित हैं। आमतौर पर आंखों के नीचे काले घेरे बढ़ती उम्र के कारण भी होते हैं। इसके अलावा कई बार यह समस्या आनुवंशिक भी होती है। आंखों में खिंचाव की वजह से काले घेरे बन सकते हैं। आंखों में सूखापन भी वजह बन सकती है। इसके अलावा डिहाइड्रेशन या धूप के कारण हो सकते...

कहानी डेढ़ टिकट में एक बुजुर्ग ने बयां किया श्रीगणेश के प्रति अपना प्रेम, कविता उनींदी बूंदे बारिश की खूबसूरती बताती है

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कहानी : डेढ़ टिकिट महानगर के उस अंतिम बसस्टॉप पर जैसे ही कंडक्टर ने बस रोक दरवाज़ा खोला, नीचे खड़े एक देहाती बुज़ुुर्ग ने चढ़ने के लिए हाथ बढ़ाया। एक ही हाथ से सहारा ले डगमगाते क़दमों से वे बस में चढ़े, क्योंकि दूसरे हाथ में थी भगवान गणेश की एक अत्यंत मनोहर बालमूर्ति थी। गांव जाने वाली उस आख़िरी बस में पांच-छह सवारों के चढ़ने के बाद पैर रखने की जगह भी जगह नहीं थी। बस चलने पर हाथ की मूर्ति को संभाल, उन्हें संतुलन बनाने की असफल कोशिश करते देख जब कंडक्टर ने अपनी सीट ख़ाली करते हुए कहा कि दद्दा आप यहां बैठ जाइए, तो वे उस मूर्ति को पेट से सटा आराम से उस सीट पर बैठ गए। कुछ ही मिनटों में बाल गणेश की वह प्यारी-सी मूर्ति सब के कौतूहल और आकर्षण का केन्द्र बन गई। अनायास कुछ जोड़ी हाथ श्रद्धा से उस ओर जुड़ गए। कंडक्टर पीछे के सवारों से पैसे लेता दद्दा के सामने आ खड़ा हुआ और पूछा, ‘कहां जाओगे दद्दा’ तो जवाब देते हुए मूर्ति को थोड़ा इधर-उधर कर उन्होंने धोती की अंटी से पैसे निकालने की असफल कोशिश की। उन्हें परेशान होता देखकर कंडक्टर ने कहा, ‘अभी रहने दीजिए। उतरते वक़्त दे दीजिएगा।’ और एक बार फिर दद्दा गणप...

रोज 80 रुपए कमाने वाले किसान की बेटी हैं सोनाली, इंडिया से लेकर अमेरिका के डांस शो में कलाबाजियां दिखाकर दर्शकों की पाई तारीफ

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कोलकाता की भिवाश एकेडमी ऑफ डांस के दो डांसर्स सुमंत मारजू और सोनाली मजूमदार ने अमेरिका गॉट टैलेंट में अपने बेहतर परफॉर्मेंस से जजों को हैरान कर दिया। इस जोड़ी ने शो में फिल्म ''फटा पोस्टर निकला हीरो के गाने धतिंग नाच'' पर शानदार डांस किया। इस शो में शामिल होने वाले लोगों ने सोनाली की दिल खोलकर तारीफ की। उनकी नजरों में सोनाली के प्रति सम्मान उस वक्त और बढ़ा जब वहां मौजूद लोगों को उनके परिवार के बारे में पता चला। सोनाली ने बताया कि उनके पिता एक किसान हैं जो रोज 80 रुपए कमाते हैं। आर्थिक तंगी के चलते सोनाली ने अपने जीवन में हर दिन चुनौतियों का सामना किया है। यहां तक कि कई बार उनके घर में दो वक्त की रोटी भी नहीं होती थी। जिसके चलते उन्हें भूखा सोना पड़ता था। आज सोनाली ने अपनी प्रतिभा के बल पर परिवार को जो शोहरत दिलाई है, वो यकीनन तारीफ के काबिल है। सोनाली मजूमदार 2012 में इंडियाज गॉट टैलेंट सीजन 4 के विजेता भी रही हैं। सोनाली ने अपने कमाए हुए पैसों से जमीन खरीदी और घर बनवाया। इससे पहले सोनाली ने ब्रिटेन गॉट टैलंट में भाग लिया था। वहां उन्होंने अपने गांव के बारे में ब...

मयूरी भट्टाचार्जी ने बाढ़ राहत किट में सैनिटरी पैड्स शामिल करने के लिए की Change.org की शुरुआत, एक रोड़ ट्रिप से मिली इस दिशा में काम की प्रेरणा

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असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा 21 अगस्त को प्रकाशित दैनिक बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार, असम में चल रही बाढ़ से 30 जिलों के 56.9 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इस बाढ़ से घिरी महिलाओं की तमाम परेशानियों के साथ एक परेशानी सैनिटरी पैड न मिल पाना भी है। राहत किट में सैनिटरी पैड को शामिल करने के लिए कार्यकर्ता मयूरी भट्टाचार्जी ने Change.org याचिका शुरू की है। असम में 600 से अधिक राहत शिविर और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल तैनात किया गया है। इन मुश्किल हालातों में उन महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड की कोई सुविधा नहीं है जिन्हें हर महीने इसकी जरूरत होती है। बाढ़ राहत किट में सैनिटरी पैड का न होना महिलाओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण ही है। मयूरी कहती हैं - ''मैं असम की बाढ़ प्रभावित उन लाखों लड़कियों और महिलाओं की ओर से बोल रही हूं जो हर साल बाढ़ में फंस जाती हैं। यहां जब बाढ़ का पानी आता है तो घर का एक कपड़ा भी साफ और सूखा नहीं रहता। जब इन महिलाओं को राहत कैंप में जगह दी जाती है तो वहां भी इनके लिए सैनिटरी पैड की सुविधा नहीं होती। न ही टॉयलेट का उचित प्रबंध होता है''। असम में...

अगर आप वजन कम करना चाहती हैं तो लो कैलोरी मूंग की दाल खाएं, यह इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मदद करती है

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मूंग की दाल को लेकर यह माना जाता है कि ये बीमारों वाली दाल है। लेकिन असल में मूंगदाल कितनी हल्की और पाचन में आसान होती है, इसका अंदाज़ा कम ही लोगों को है। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व भी शरीर के लिए बहुत फ़ायदेमंद होते हैं। प्रोटीन का अच्छा स्रोत जो लोग शाकाहारी हैं, उनके लिए मूंग की दाल उत्कृष्ट और संपूर्ण प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। 100 ग्राम मूंगदाल में क़रीब 24 ग्राम प्रोटीन और 60% अमीनाे एसिड पाया जाता है। वज़न घटाने में मददगार मूंगदाल का कोई भी व्यंजन काफ़ी आधारयुक्त होता है, यानी कि खाने में हल्का होने के बावजूद पेट भरा रहता है। इसे फाइबर का भी बहुत अच्छा स्रोत माना जाता है। फाइबर व प्रोटीन दोनों ही वज़न घटाने में मदद करते हैं और क़ब्ज़ की समस्या दूर करते हैं। पचने में आसान कुछ दालें, सेम और फलियां कुछ लोगों में गैस और पेट फूलने का कारण बन सकती हैं, लेकिन हरी मूंगदाल पचने में सबसे आसान है। पकाने से पहले इसे पानी में भिगोने से ये अच्छी बनती है और इसे अंकुरित करके भी खाया जा सकता है। मूंगदाल में एंटी-एजिंग प्रॉपर्टीज होती है जो झुर्रियों को कम करने में मददगार हैं। बीम...

मानसी चौधरी ने की महिला अधिकारों से जुड़े भारत के पहले वेब पोर्टल 'पिंक लीगल' की शुरुआत, वे कहती हैं यह पोर्टल महिलाओं को उनका हक दिलाने में मदद करेगा

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जुलाई 2017 में एक रात को लगभग 11 बजे थे। उस रात मानसी चौधरी ने अपने 25 वें जन्मदिन की खरीदारी पूरी की। वह घर जाने के लिए जैसे ही अपनी कार में बैठी तो कुछ लड़के उसके साथ छेड़छाड़ करने लगे। कार से उतरे दो लड़कों ने मानसी को गालियां दीं और धमकियां देना शुरू कर दिया। उन्होंने कार के बोनट और खिड़की पर हाथ मारा और गाड़ी का दरवाजा खोलने की कोशिश की। जैसे-तैसे वो वहां से निकल गईं। ये घटना मानसी के लिए अविश्वसनीय थी। मानसी ने इन लड़कों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। मानसी को उस वक्त इस बात का अहसास हुआ कि मैं एक वकील हूं। इसलिए ये बात जानती हूं कि अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ किस तरह आवाज उठाना चाहिए। लेकिन वे महिलाएं जो कानूनी अधिकारों के बारे में नहीं जानती, वे अपने हक के लिए किस तरह लड़ती होंगी। इसी सोच के साथ मानसी ने महिलाओं के लिए कानूनी अधिकारों से जुड़े पहले वेब पोर्टल की शुरुआत की। इसके जरिये वे महिलाओं को कानून संबंधी जानकारी देती हैं ताकि महिलाएं अपने अधिकारों के लिए लड़ सकें। वे चाहती हैं कि हमारे देश की महिलाओं को न्याय व्यवस्था और खुद के लिए बने कानूनों की जानकारी हो। उनके वेब पोर्टल प...

50% महिलाएं सोशल मीडिया पर सेल्फी अपलोड करने के लिए करती हैं फिल्टर का इस्तेमाल, 80% महिलाओं ने माना सोशल मीडिया ने बनाया उन्हें ब्यूटी कॉन्शस

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महिलाएं सोशल मीडिया पर अपने फोटो पोस्ट करने से पहले खुद की तस्वीरों पर एक फिल्टर का उपयोग करती हैं क्योंकि साधारण फोटो में दिखने वाले चेहरे के रिंकल्स और स्ट्रेच मार्क्स उन्हें शर्मिंदगी का अहसास कराते हैं। 2000 महिलाएं पर किए गए इस सर्वे में पाया गया कि यह फीलिंग 24 साल या इससे कम उम्र की युवतियों में सबसे ज्यादा होती है। इनमें से 51% युवतियां ऐसी भी है जिन्होंने माना कि वे बिना फिल्टर के सोशल मीडिया पर कभी अपनी फोटो अपलोड नहीं करती हैं। डिजिटल एप का इस्तेमाल करती हैं वे महिलाएं जिनके शरीर पर सेल्युलाईट या स्ट्रेच मार्क्स के निशान थे, उनमें से सिर्फ 16% ने इन कमियों के साथ सोशल मीडिया पर अपनी फोटो पोस्ट की। अपनी फोटो को अपलोड करने से पहले वे ऐसे डिजिटल एप का इस्तेमाल करती हैं जिससे उनकी खूबसूरती कम करने वाले इन निशानों को मिटाया जा सके। तारीफ के कमेंट्स और लाइक्स मिलते हैं ब्यूटी कॉन्शस इन महिलाओं में से 50% ने माना कि उनकी बिना एडिट की गई फोटो के बजाय फिल्टर का उपयोग करके अपलोड की गई फोटोज को लोग ज्यादा पसंद करते हैं। इन फोटो को देखकर उन्हें तारीफ भरे कमेंट्स और लाइक्स मिलते ...