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Showing posts from July, 2020

कोरोना को हराने वाली 105 साल की असमा बीवी की कहानी, बेटी से संक्रमण फैला और तीन महीने तक इलाज के बाद अब घर लौटीं

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केरल के कोल्लम में रहने वाली 105 साल की असमा बीवी 3 माह तक कोरोना से लड़ने के बाद घर लौटी हैं। असमा केरल की सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर हैं। उन्हें 20 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। असमा बीवी को कोरोना का संक्रमण उनकी बेटी से हुआ था। बेटी का कहना है कि पूरे इलाज के दौरान मां ने कोरोना का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उम्र अधिक होने के कारण वह पहले ही कई तरह की दिक्कतों से जूझ रही थीं, इस दौरान डॉक्टर्स में लगातार नजर बनाए रखी। स्वास्थ्य मंत्री ने उनके जज्बे की तारीफ की असमा बीवी ने जिस तरह कोरोना का डटकर मुकाबला किया है, उसके लिए केरल की स्वास्थ्यमंत्री केके शैलजा ने उनकी तारीफ की है। स्वास्थ्यमंत्री ने कहा, उन्होंने इस उम्र में जो जज्बा दिखाया वह काबिलेतारीफ है। स्वास्थ्यमंत्री ने डॉक्टर्स, नर्स और हेल्थ वर्कर्स का भी शुक्रिया अदा किया। केरल में बुधवार को कोरोना के 903 मामले सामने आए। इसमें हेल्थ वर्कर भी शामिल हैं। संक्रमितों का आंकड़ा 21,797 तक पहुंच गया है। अप्रैल में केरल के थॉमस बने थे देश के सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर असमा बीवी से पहले सबसे उ...

घर के काम में व्यस्तता के बीच ना करें हाथ और पैरों की अनदेखी, इन आसान नुस्खों से करें हाथ-पैरों की देखभाल

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कोरोना के कारण बार-बार हाथ धोना मजबूरी बन गई है। वहीं महिलाओं को घर के कार्यों के चलते खुद की देखभाल का वक़्त नहीं मिल पा रहा है। इसलिए समय निकालिए और हाथ-पैरों की देखभाल पर ध्यान दीजिए। रूखापन दूर करें एक चम्मच ग्लिसरीन को गुलाब जल में मिलाकर रख लें। इस मिश्रण को सोते समय हाथ-पैरों पर लगा लें। इससे हाथ-पैरों में नमी बनी रहेगी और वे कोमल बनेंगे। इसके साथ ही एक चम्मच शक्कर में नींबू का रस मिलाकर हाथ-पैरों की मालिश करें और कुछ देर बाद गुनगुने पानी से धो लें। ग्लिसरीन, गुलाब जल और नींबू के रस के मिश्रण से नियमित मालिश करने से पैर मुलायम रहते हैं। कच्चे दूध की मालिश दूध उबालने से पहले उसे थोड़ा-सा निकालकर फ्रिज में रख लें। जब भी समय मिले इस दूध को हाथ-पैरों पर मल लें और धीरे-धीरे मालिश करें। इससे हाथ-पैरों पर जमी गंदगी दूर होती है, साथ ही त्वचा मुलायम बनती है। अगर तैलीय त्वचा की समस्या नहीं है तो चेहरे पर भी कच्चे दूध की मालिश कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को रोज़ दुहरा सकते हैं या फिर 1-2 दिन के अंतराल में भी कर सकते हैं। कपड़े धोने के बाद यदि डिटर्जेंट/साबुन युक्त पानी में हाथ-पैर अधिक सम...

शीशे में करीब से देखिए चेहरा, गौर कीजिए कि आपकी त्वचा आपकी सेहत के बारे में क्या संकेत दे रही है?

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चेहरे पर मुंहासे, होंठ फटना या त्वचा पर खुजली होना आम समस्याएं लगती हैं। कई दफ़ा सोचते हैं कि प्रदूषण, मौसम या हॉर्मोन में बदलाव इसके कारण हैं। परंतु हर बार ऐसा नहीं होता है। ये अंदरूनी समस्याएं भी हो सकती हैं, जो त्वचा पर नजर आने लगती हैं। कुछ ऐसी ही त्वचा संबंधी समस्याएं आपको बता रहे हैं, जो आम लगती हैं, लेकिन असल में ये आपकी सेहत का हाल बताती हैं। आंखों के नीचे काले घेरे अधिक नींद लेना, ज्यादा थकान, ज्यादा देर तक जागते रहना, टीवी या लैपटॉप/कंप्यूटर स्क्रीन पर अधिक वक़्त बिताना या अनियमित जीवनशैली के कारण बहुत से लोग काले घेरों की समस्या से पीड़ित हैं। आमतौर पर आंखों के नीचे काले घेरे बढ़ती उम्र के कारण भी होते हैं। इसके अलावा कई बार यह समस्या आनुवंशिक भी होती है। आंखों में खिंचाव की वजह से काले घेरे बन सकते हैं। आंखों में सूखापन भी वजह बन सकती है। इसके अलावा डिहाइड्रेशन या धूप के कारण हो सकते हैं। क्या करें : काले घेरों का उपचार इनके कारणों पर निर्भर करता है, लेकिन कुछ उपाय आप कर सकते हैं, जैसे- कोल्ड टी की थैली लगाना और पर्याप्त नींद लेना। कोल्ड कंप्रेस लगाने से सूजन कम हो जाती है...

कामकाजी महिला की पीएम से अपील- झाड़ू पर क्या लिखा होता है कि महिलाएं ही चलाएंगी? पुरुष हाथ क्यों नहीं बंटाते?

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क्या झाड़ू के हैंडल पर लिखा होता है कि इसे केवल महिलाएं ही चलाएंगी? क्या वॉशिंग मशीन और गैस स्टोव के मैनुअल में भी ऐसा कुछ लिखा होता है? फिर क्यों ज्यादातर पुरुष घर के कामों में हाथ नहीं बंटाते हैं? कमोबेश हर घर से जुड़े ये सब सवाल उस ऑनलाइन याचिका के अंश हैं जो कोरोनाकाल में घर और रसोई में अचानक बढ़े महिलाओं के कामकाज को लेकर दायर की गई है। पिटीशन मुंबई में रहने वाली सुबर्णा घोष ने फाइल की है। इस पर तकरीबन 71 हजार से ज्यादा लोग अपने हस्ताक्षर कर चुके हैं। घोष चाहती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने किसी संबाेधन में इस मामले पर कुछ बोलें। इस मसले का कोई उपाय सुझाएं और पुरुषों से कहें कि वे भी घर के कामों में अपनी जिम्मेदारी समझें। सुबर्णा घोष ने शुरू की ऑनलाइन मुहिम दरअसल, लॉकडाउन के दौरान सुबर्णा पर घर और ऑफिस के कामकाज का बोझ आ पड़ा। याचिका उन्हीं के अनुभवों का सार और उनके ही घर की कहानी है। बल्कि यूं कहें-एक तरह से घर-घर की कहानी है। तमाम महिलाएं ऐसी ही परिस्थितियों का सामना कर रही हैं। घरेलू कामकाज की जिम्मेदारी सिर्फ उन्हीं के ऊपर होती है। खाना बनाना, साफ-सफाई, कपड़े धोना, तह क...

किसी ने दोस्तों को ग्रीटिंग कार्ड भेजने का चलन शुरू किया तो कहीं डिनर पार्टी से फ्रेंडशिप के सेलिब्रेशन की नींव पड़ी, अमेरिका में खुशकुशी की कहानी भी प्रचलित हुई

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अगस्त के पहले रविवार को मनाए जाने वाले फ्रेंडशिप डे की शुरुआत दुनियाभर में अलग-अलग समय पर हुई लेकिन मकसद एक ही था एक दिन अपने दोस्त के नाम। इसे इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे का नाम दिया गया। इस दिन की शुरुआत कैसे हुई इसकी 3 कहानियां हैं। तीनों ही काफी दिलचस्प हैं। इस साल फ्रेंडशिप डे 2 अगस्त को मनाया जाएगा। जानिए इस खास दिन की शुरुआत से जुड़ी 3 कहानियां... पहली कहानी : एक व्यापारी ने एक-दूसरे को कार्ड देने की परंपरा शुरू की एक प्रचलित कहानी के मुताबिक, इस दिन की शुरुआत करने का श्रेय एक व्यापारी को जाता है। 1930 में जोएस हॉल नाम के व्यापारी ने सभी लोगों के लिए एक ऐसा दिन तय किया जब दो दोस्त एक-दूसरे को ग्रीटिंग कार्ड दें और इस दिन को यादगार बनाएं। जोएस हॉल ने इसके लिए 2 अगस्त का दिन चुना। बाद में यूरोप और एशिया के कई देशों में फ्रेंडशिप डे मनाने की परंपरा शुरू हुई। दूसरी कहानी : डिनर पार्टी करके फ्रेंडशिप डे की नींव रखी फ्रेंडशिप डे से जुड़ी दूसरी कहानी के मुताबिक, 20 जुलाई 1958 को डॉ. रमन आर्टिमियो ने एक डिनर पार्टी के दौरान अपने दोस्तों के साथ मित्रता दिवस मनाने का विचार रखा था। पराग्वे...

बच्चों को समझाने के लिए उनके दोस्त बनकर देंखें, अपनी बात करने के तरीके में प्यार घोलकर आप भी जीत सकते हैं उनका दिल

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बच्चों को अनुशासित कैसे किया जाए, शायद सभी अभिभावक इस अजब दुविधा से दो-चार होते होंगे। सवाल कई हैं बच्चों को बाहरी माहौल और टीवी-इंटरनेट जैसे माध्यमों के दुष्प्रभावों से बचाना है, किंतु उन्हें इस सबसे पूरी तरह दूर भी नहीं रखा जा सकता। बच्चे किससे मिल रहे हैं, दोस्ती कर रहे हैं, अभिभावकों के लिए हर समय निगरानी करते रहना मुमकिन नहीं है। बच्चे सही दिशा में जाएं इसका एकमात्र तरीक़ा है कि उनमें सकारात्मक अनुशासन और अच्छे संस्कार डाले जाएं। समस्या फिर सामने खड़ी हो जाती है - तरीक़ा कैसा हो? डांट-डपट और सज़ा से उनके मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। डांट की वजह से बच्चे शुरू-शुरू में बात तो मान जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद इससे उनके मन में खटास पैदा होने लगती है और वे माता-पिता से कटने लगते हैं। उनके मन में यह सोच पैदा हो जाती है कि बड़े उनकी बात और ज़रूरतें नहीं समझेंगे और उन्हें फिर से चुप करा दिया जाएगा। इसी से शुरू होता है बच्चों का बातें छुपाना। ऐसा न हो इसके लिए व्यवहार और शब्दों में बदलाव ज़रूरी हैं। जानिए कुछ प्रभावी तरीक़े। शब्दों को थोड़ा बदलें किसी को भी नियंत्रण में रहना पसंद नहीं होता, ब...

ट्रांसजेंडर राजकुमारी की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बाद भी 8 बच्चों को गोद लेकर कर रहीं परवरिश, कोरोना काल में 1 लाख लोगों को बांट चुकी हैं अनाज

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ट्रांसजेंडर्स को आज भी हमारे समाज में वो सम्मान नहीं मिला है, जिसकी वो हकदार हैं। कई परेशानियों का सामना करने के बाद भी आए दिन हम उन ट्रांसजेंडर्स के बारे में सुनते हैं जो समाज के लिए मिसाल बने हुए हैं। ऐसी ही ट्रांसजेंडर महिलाओं में से एक हैं राजकुमारी जो जीवन में कड़े संघर्ष के बाद भी आज समाज के लिए मिसाल बनी हुई हैं। उनके माता-पिता ने उन्हें ये कहकर निकाल दिया था कि वे परिवार पर कलंक हैं। इसके बाद भी राजकुमारी ने हार नहीं मानी और अपने पैरों पर खड़ी हुईं। घर से निकल जाने के बाद उन्होंने समाज के ताने भी सहे लेकिन लोगों के डर से जिंदगी में कभी निराशा को गले नहीं लगाया। राजकुमारी ने कई अनाथ बच्चों को गोद लिया। उन्होंने कई जरूरतमंदों की शादियां भी करवाईं। राजकुमारी ने आठ बच्चों को गोद लिया और मां की तरह उनकी जिम्मेदारी संभाली है। राजकुमारी अपनी मेहनत से इकट्‌ठे किए गए पैसों से गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करती हैं। गरीबों के पालन पोषण के लिए अपनी आमदनी से वे 75% हिस्सा दान करती हैं। वे कभी मदद से पीछे नहीं हटती हैं। राजकुमारी ने अब तक आठ बच्चों को गोद लिया और मां की तरह उनकी जिम्मे...

महिलाओं की उलझन भरी जिंदगी को आसान बनाने के 5 नियम,  तनाव से आजाद होकर मजे से गुजारें जिंदगी

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महिलाओं की ज़िंदगी में दौड़-भाग कभी कम नहीं हो सकती। तो क्यों न इन उलझनों को सुलझाने के कुछ नियम बनाएं ताकि आप तनाव मुक्त रहकर मजे से जिंदगी गुजार सकें। इसकी शुरुआत आज से ही करें। 1. ठहराव के दो पल इसे पॉज़ कह सकते हैं। कुछ ख़रीदने से पहले, बाहर का कुछ खाने से पहले, किसी भी फ़ैसले से पहले पॉज़ लें और फिर अमल करें। कुछ लोग तो पार्किंग में वाहन खड़ा करके, दो मिनट सोचते हैं फिर बाहर आते हैं। ये दो मिनट का ठहराव उनके कामों की सूची ही दुरुस्त नहीं करता, उन्हें तनाव भुलाने में मदद भी करता है। 2. भोजन व्यवस्था सरल बनाएं रसोई में जाकर सोच की मुद्रा अपनाने या घर के हर सदस्य के पीछे घूमकर क्या बनाऊं का फ़ैसला कराने के बजाय, सुबह ही तय कर लें कि तीनों समय क्या बनेगा। अपनी रसोई में सामान भी ऐसे ही जमाएं कि जो तय करें, उसकी सामग्री फटाफट मिले और आप भोजन बनाकर चिंतामुक्त हों। 3. दर्द के बिंदु की खोज हम सबके पास तकलीफ़ पैदा करने वाले काम, लोग या रूटीन होते हैं। अपने दर्द का सिरा पकड़ते हुए, उसकी जड़ तक पहुंचे। एक बार पीड़ा के सिरे को जान लिया, तो समझने की तैयारी कीजिए कि किस काम, इंसान या वजह से आपको तक...

दादा और पोते के प्यार को बताती लघुकथा ''ऑनलाइन'', मदन ने उस भिखारी की दुआ किस तरह ली, दर्शा रही है लघुकथा ''भगवान को भाेग से''

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लघुकथा : ऑनलाइन लेखिका : शर्मिला चौहान दादा जी को ‘ऑनलाइन’ रहते बच्चों से शिक़ायत थी। लेकिन टाइम पास के लिए ख़ुद ऐसा करना उन्हें बहुत भाया। कोरोना के चलते पिछले तीन-चार महीनों से बुज़ुर्गों के कट्टा समूह में निराशा छाई हुई थी। पहले रोज़ मिलकर दुनियाभर की बातें करते, एक-दूसरे का सुख-दुख साझा करते और किसी न किसी बहाने से चाय-नाश्ते का लुत्फ़ भी उठाते। अपने जन्मदिन पर घर से बना नाश्ता लाकर सब एक साथ मज़े करते थे। लेकिन मार्च से सब अपने-अपने घरों में क़ैद हो गए थे। ऐसा बताया गया है कि यह वायरस बच्चों और बुज़ुर्गों को जल्दी चपेट में लेता है, इस कारण सभी अपने-अपने घरों में बंद पड़े थे। एक शाम, समूह के कुछ लोग अपनी-अपनी बालकनी से एक-दूसरे को देखकर हाथ हिलाकर ख़ुश हो रहे थे । गुप्ता जी के पोते अंकित ने देखा तो पूछा, ‘दादाजी... आप लोग बहुत दिनों से मिले नहीं हैं न?’ इस पर दादाजी ने हां में सिर हिलाया। ‘आप सभी के पास फोन है न... आप लोगों ने वॉट्सएप समूह भी बनाया है तो आज आप सब ऑनलाइन वीडियो बातचीत करना,’ यह कहते हुए अंकित ने सभी को सूचना दी। अब आधे घंटे बाद दादाजी के कमरे से ज़ोर-ज़ोर से बातें ...

शरीर से दुर्गंध क्यों आती है, वैज्ञानिकों ने ढूंढा कारण, कहा- आदिमानव के समय से आर्मपिट में पाई जाने वाली बैक्टीरिया दुर्गंध फैलाने वाला एंजाइम बनाती हैं

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शरीर से दुर्गंध क्यों आती है, वैज्ञानिकों ने इसका कारण पता लगा लिया है। वैज्ञानिकों का कहना है इसका कारण एक एंजाइम है जिसे आर्मपिट (बगल) में पाई जाने वाली बैक्टीरिया बनाती हैं। यही शरीर से दुर्गंध के लिए जिम्मेदार होता है। शोधकर्ताओं ने इसे बीओ एंजाइम नाम दिया गया है। यह रिसर्च ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क ने यूनिलिवर के साथ मिलकर की है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, स्ट्रेफायलोकोकस होमिनिस बैक्टीरिया खास तरह रसायन रिलीज करती है जो दुर्गंध की वजह बनता है। यह बैक्टीरिया आदिमानव के काल से इंसानों में है। इसलिए पीढ़ी तरह पीढ़ी इसने आर्मपिट में अपनी जगह बनाई है। डियोड्रेंट तैयार करने में मदद करेगी यह रिसर्च शोधकर्ता डॉ. गॉर्डन जेम्स के मुताबिक, यह रिसर्च कई नई बातें सामने लाई है। जैसे उस एंजाइम को खोजा गया जो सिर्फ आर्मपिट की बैक्टीरिया बनाती हैं। यह लाखों सालों से इंसानों में मौजूद हैं। इसकी पहचान होने के बाद अब एंजाइम के मुताबिक, डियोड्रेंट तैयार किए जाएंगे ताकि इसे न्यूट्रिलाइज या खत्म किया जा सके। बैक्टीरिया को बिना नुकसान पहुंचाए दुर्गंध कंट्रोल करने की तैयारी शोधकर्ता डॉ. माइकल रुडेन...

वो बारिश-सी लड़की : अनाहिता की चुलबुलाहट एक अजनबी को कैसे खींच लाई उसके करीब, पढ़िए इस कहानी में

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खिड़की से देखते हुए लग रहा था मानो पेड़ बेतहाशा दौड़े जा रहे हैं, मगर मंज़िल कहां है, पता नहीं। मेरी ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही है, एक दौड़ है जिसमें मैं भागे जा रहा हूं। भागना कितना आसान है न! जब कुछ समझ नहीं आए तो भाग जाओ। पर तब कहां जाए इंसान, जब ख़ुद से भागना ही ज़रूरी हो। पिछले पांच सालों में ये मेरा तीसरा ट्रांसफ़र है। बस भाग रही है ज़िंदगी और भाग रहा हूं मैं- ख़ुद से, अपनी उन यादों से। सोचते-सोचते तृष्णा का चेहरा दिमाग़ में आया और एक बार फिर से मैंने आंखें बंद कर लीं। ‘सर, ओ सर, आपका स्टॉपेज आ गया। सो गए क्या?’ कंडक्टर ने झकझोरा तो मैं अपने ख़्यालों से बाहर आया। अपना सामान उतारकर मैं अपने गंतव्य की ओर चल पड़ा। आजकल मुझे ये नए शहर अजनबी-से नहीं लगते, क्योंकि मैंने अपनों को अजनबी होते देखा है। ‘अच्छा, तो तुम हो शिवम?’ मेरी मकान मालकिन ने ऊपर की मंज़िल की चाबी मुझे थमाते हुए कहा। ‘लंबी दूरी से आए हो, थक गए होगे। चाय पीकर जाओ।’ उन्होंने कहा। ‘नहीं, धन्यवाद।’ और मैं अपनी औपचारिकता वाली मुस्कान देकर चला आया। कितनी अजीब है ये दुनिया, यहां मुखौटे लगाकर घूमना ही पड़ता है, नक़ली हंसी, नक़ली चेहरा और नक़...

चेहरे पर अनार लगाने से दूर होगी टैनिंग, काबुली चने और हल्दी लगाने से दाग-धब्बे होंगे दूर और चमकेगा चेहरा

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त्वचा की सफ़ाई को लेकर अक्सर लोग लापरवाही बरत जाते हैं। चेहरा धोना ही काफ़ी समझते हैं या क्लींज़र लेते वक़्त कुछ भी ले आते हैं, यह सोचकर कि ज़रा-सा तो लगाना है। इस तरह की लापरवाही त्वचा से उसकी चमक छीन लेती है। इसलिए त्वचा की सफ़ाई का ख़्याल रखें। इसके लिए घर के बने क्लींज़र काफ़ी मददगार हैं। ये त्वचा को साफ़ रखने के साथ उसे ठंडक और चमक देते हैं। 1. अनार अनार का सेवन शरीर की सेहत के लिए जितना फ़ायदेमंद होता है, उतना ही इसका रस रूप को लाभ पहुंचाता है। अनार का रस टैनिंग को काफ़ी हद तक कम कर देता है। अनार का थोड़ा-सा रस ठंडे दूध में मिलाएं और चेहरे पर लगाएं। 10-15 मिनट बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। ऐसा हफ्ते भर तक रोज़ करने से त्वचा खिल उठेगी और साफ़ होने के साथ ही टैनिंग भी दूर हो जाएगी। 2. तरबूज़ तरबूज़ त्वचा को एक्सफोलिएट करने के साथ ही उसे मुलायम भी बनाता है। चेहरा धोने के लिए साबुन या फेसवॉश की जगह तरबूज़ का मुलायम हिस्सा 20 मिनट तक चेहरे पर हल्के हाथों से रगड़ें और उसके बाद धो लें। इससे चेहरे की खोई हुई नमी वापस आ जाती है। 3. शक्कर शक्कर को दरदरा पीसकर पानी या तेल में मिलाकर चेहरे की मसाज ...

हिजाब पहनकर बॉक्सिंग सीखाने वाली ब्रिटेन की पहली महिला हैं जाहरा बट, घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को देती हैं ट्रेनिंग

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जाहरा बट ब्रिटेन की बॉक्सिंग कोच हैं। वे नॉटिंघमशायर के एस्प्ले में रहती हैं। जाहरा को प्रेग्नेंसी के बाद डिप्रेशन ने घेर लिया। तब उन्होंने स्पोर्ट्स के जरिये डिप्रेशन दूर करने का प्रयास किया। तीन बच्चों की मां जाहरा घरेलू हिंसा का शिकार हुई महिलाओं को बॉक्सिंग सिखाती हैं। वे ट्रेनिंग के दौरान भी अपना हिजाब नहीं हटाती हैं। इसकी वजह बताते हुए वह कहती हैं मैं नहीं चाहती कि हिजाब हटाकर लोगों के भद्दे कमेंट्स सुनूं। 40 वर्षीय जारा ने बॉक्सिंग को अपना फुल टाइम करिअर बनाया। एक बॉक्सर के तौर पर उन्हें मिलने वाले पॉजिटिव मैसेज पाकर वे काफी खुश हैं। वे कहती हैं ये संदेश मुझे लोगों के कमेंट्स का सामना करने की हिम्मत देते हैं। जाहरा को इस बात का दुख है कि हिजाब की वजह से उन्हें लोगों के भेदभाव का सामना करना पड़ता है। वे कहती हैं ये मेरे लिए दुखदायी है। वो भी तब जब मैं आत्मनिर्भर हूं। लोगों की बातें सुनने से जाहरा की भावनाएं आहत होती हैं। इससे मेरे परिवार को यह लगता है कि मैं एक ऐसा काम कर रही हूं जो कई बार मेरे तनाव की वजह भी बन जाता है। हालांकि जाहरा इन कमेंट्स से दूर अपने काम पर फोकस कर...

महिलाओं में लगातार बढ़ता तनाव बन रहा मेंटल डिसऑर्डर की वजह, साइकोथैरेपी और काउंसिलिंग से मिल सकती है निजात

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विश्व में हो रहे अध्ययनों से पता चलता है कि आम जीवन में तनाव की मात्रा बढ़ गई है। वजह है कोरोनावायरस और उसके चलते पैदा हुए हालात। अभी बीमारी का भय तो है ही, लगातार सतर्क रहने और सावधानियों का पालन करने की विवशता भी है। शारीरिक गतिविधियां कम हो गई हैं और ज़्यादातर वक़्त घर पर ही कट रहा है। इन सब कारणों से मन पर तनाव हावी है, जिसकी परिणति बहसबाज़ी, चिड़चिड़ाहट, हताशा और ग़ुस्से के रूप में होती है।अक्सर हम सभी घर से बाहर कहीं घूमकर, दोस्तों से मिलकर तनाव दूर कर लेते हैं, लेकिन अभी इसमें अड़चनें हैं और यही सीमाएं मुश्किलें पैदा कर रही हैं ख़ासकर महिलाओं के लिए। स्त्रियां क्यों हैं ज़्यादा प्रभावित दरअसल, महिलाएं ज़्यादा भावुक और संवेदनशील होती हैं, इसलिए वे तनाव भी जल्दी लेती हैं। अपनी ज़िम्मेदारियों, रिश्तों, परिवार की वे अधिक परवाह करती हैं, उनके मन में बहुत कुछ चल रहा होता है। जब तनाव सहनशक्ति के बाहर हो जाता है, तो इसका परिवर्तित रूप शरीर और व्यवहार में दिखाई देने लगता है। 1980 से पहले भावनाओं के अनियंत्रित उबाल को ‘केवल स्त्रियों में होने वाला' हिस्टीरिया नामक मानसिक रोग माना जाता था। स...

आलिया भट्‌ट से लेकर कृति सेनन की खूबसूरती बढ़ा रही सिल्वर ज्वेलरी, कीमत में कम होने की वजह से फैशनेबल गर्ल्स की बनी पहली पसंद

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बाॅलीवुड दीवाज जिस तरह की ज्वेलरी पहनना शुरू करती हैं, कुछ ही दिनों में वो एक ट्रेंड बन जाता है। वैसे भी बजट में कम होने की वजह से चांदी के गहने गोल्ड या डायमंड के तुलना में आसानी से खरीदे जा सकते हैं। इसे वेस्टर्न से लेकर साड़ी जैसे एथनिक वियर के साथ भी पहना जा सकता है। फैशन में इन रहने का ये लो बजट ऑप्शन गर्ल्स की पहली पसंद बना हुआ है। सिल्वर ज्वेलरी सोनम की सिंपल ड्रेस को एलिगेंट लुक दे रही है। सोनम कपूर उन्हें सिल्वर ज्वेलरी इतनी पसंद है कि वे एयरपोर्ट लुक के साथ भी इसे कैरी करती हैं। बोहो मैक्सी ड्रेस हो या डेनिम्स और ओवरसाइज्ड टॉप सोनम अपने लुक को सिल्वर ज्वेलरी से एक्सेसराइज़ करना पसंद करती हैं। वैसे भी सोनम उन एक्ट्रेसेस में से एक हैं जिन्होंने वेस्टर्न आउटफिट्स के साथ भी सिल्वर ज्वेलरी पेयर करने की शुरुआत की थी। ड्रेस के कलर से मैच करती हुई आलिया की ज्वेलरी उनकी खूबसूरती बढ़ा रही है। आलिया भट्‌ट आलिया की तरह सिल्वर झुमके एथनिक वियर के साथ खूब सूट करते हैं। व्हाइट से लेकर पेस्टल कलर की ड्रेस के साथ इसकी पेयरिंग अच्छी लगती है। अगर आप लाइट पीसेस की शौकीन हैं तो सिल्वर के...