दो अनुभव:मदद और भलाई का कोई चेहरा नहीं होता कोई भी कभी भी किसी की भी मदद कर सकता है, इसके साथ ही जानिए मददगार कभी भी नौकर नहीं होता और जो ऐसा समझते हैं वे ग़लतफहमी में हैं



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