नई सोच:घर में रहकर बच्चों से लेकर बड़े तक सभी ऊब गए हैं, दिनभर क्या करें, क्या न करें, ऐसे में एक तरक़ीब है, क्यों न पुराने दिन फिर जी लिए जाएं...

खाली दिमाग़ शैतान का घर होता है, ये तो हम सभी ने सुना है लेकिन ख़ाली समय...! यही तो आगे बढ़कर दिमाग़ को मौके देता है कि उलझनों में पड़े, नकारात्मक निराशा-भरे विचारों को जगह दे।,इसलिए ज़रूरी है कि खाली समय को मनोरंजक गतिविधियों से भर दिया जाए।

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