कहानी:विवाह के बाद भी मैं अपने किए पर मन ही मन घुट रही थी, लेकिन पतिदेव के दिए सुझाव ने मेरी सारी चिंताएं दूर कर दी थी।

देखा-देखी में मैं क्या कर बैठी, इसका अंदाज़ा ही नहीं था। ईर्ष्या ने मुझे सच्ची संतुष्टि से दूर कर दिया। अपनी ख़ुशी के लिए मैंने एक परिवार को मुश्किलों में धकेल दिया था।

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