रिश्ते-नाते:सबके सामने तारीफ़ करना और ढेर सारे तोहफ़े देना प्रेम नहीं है, उन्हें ध्यान से सुनना और परवाह ही प्रेम है
ढेर सारे तोहफ़े, सबके सामने तारीफ़, जब समूह में हों तब साधी गई चुप्पी और सबके सामने फिक़्र जताना प्रेम की निशानी नहीं हैं ।,प्रेम उपहारों की तरह सुनहरे कागज़ में लिपटा हुआ नहीं आता। वो तो परवाह भरे सादे आचरण से झलक जाता है।,कभी आपने जांचा है कि जिनसे आप प्रेम के दावे करते हैं, दरअसल, उनकी परवाह करते हैं या नहीं?
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